Maa Durga Puja Vidhi
Maa Durga माँ दुर्गा
आदि शक्ति - रक्षा करने वाली माता, नौ रात्रियों के नवरात्र की केंद्र।
मुख्य मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
Om Dum Durgayai Namah
आवश्यक सामग्री
सामान्य पूजा सामग्री (दीपक, घी, धूप, अक्षत, रोली, कलश, पुष्प, फल) के साथ ये वस्तुएँ माँ दुर्गा के लिए विशेष हैं:
- लाल चुनरी Red chunari
- लाल पुष्प (गुड़हल, कमल) Red flowers (hibiscus, lotus)
- सोलह श्रृंगार Sringar items (16 sringar)
- सिंदूर Sindoor
- अखंड ज्योति Akhand jyot (ghee/oil lamp)
- लाल वस्त्र सहित नारियल Coconut wrapped in red cloth
- बेलपत्र Bel patra
- लाल चूड़ियां Red bangles
पूजा विधि - चरण दर चरण
शुद्धि - स्वयं और स्थान की शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ (यथासंभव नए) वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ करें, चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और चारों ओर गंगाजल छिड़कें। पूर्व या उत्तर मुख करके आसन पर बैठें।
संकल्प - अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लें। अपना नाम, गोत्र (ज्ञात हो तो), तिथि-स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलें, फिर जल देव के सम्मुख छोड़ दें।
दीप प्रज्वलन व गणेश स्मरण
घी का दीपक और धूप जलाएँ। पहले श्री गणेश का स्मरण करें ("ॐ गं गणपतये नमः") ताकि पूजा निर्विघ्न हो, फिर मन को माँ दुर्गा की ओर लगाएँ।
आवाहन - माँ दुर्गा का आवाहन
हाथ जोड़कर "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का उच्चारण करते हुए देव का मूर्ति, चित्र या कलश में आवाहन करें। पुष्प या अक्षत का आसन अर्पित करें।
पाद्य, अर्घ्य व आचमन
चरण धोने (पाद्य), हाथ धोने (अर्घ्य) और आचमन के लिए जल अर्पित करें - एक-एक चम्मच जल देव के सम्मुख थाली में छोड़ें।
स्नान / अभिषेक
मूर्ति को पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ; चित्र हो तो स्वच्छ कर गंगाजल छिड़कें।
वस्त्र व शृंगार
लाल चुनरी, शृंगार सामग्री (बिंदी, चूड़ी, सिंदूर, मेहंदी) और लाल वस्त्र अर्पित करें।
पुष्प व पत्र
लाल गुड़हल - माँ दुर्गा का प्रियतम पुष्प - गुलाब व अन्य लाल पुष्पों सहित अर्पित करें।
धूप व दीप
धूप और फिर दीप देव को दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाकर दिखाएँ; बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ।
नैवेद्य - भोग अर्पण
भोग अर्पित करें: हलवा, पूरी और काले चने (अष्टमी), नारियल, फल। थाली के चारों ओर जल की कुछ बूँदें छोड़कर देव के सम्मुख रखें।
मंत्र जप
"ॐ दुं दुर्गायै नमः" का 108 बार (एक माला) या कम से कम 11 बार स्थिर, शांत मन से जप करें।
पाठ / स्तुति
समय व सामर्थ्य अनुसार दुर्गा चालीसा, अर्गला-कवच या दुर्गा सप्तशती का अध्याय पढ़ें।
आरती
"जय अम्बे गौरी" की आरती घी के दीपक या कपूर से करें - देव के सम्मुख दक्षिणावर्त घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि
देव की विषम संख्या में प्रदक्षिणा करें (या स्थान पर ही घूमें), अंत में पुष्पांजलि अर्पित कर पूर्ण प्रणाम करें।
क्षमा प्रार्थना व प्रसाद
पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें, देव का धन्यवाद करें और प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें।
माँ दुर्गा के विशेष नियम
- माँ दुर्गा को दूर्वा अर्पित नहीं की जाती।
- संकल्प लिया हो तो नवरात्र भर अखंड ज्योत जलती रहे।
- अष्टमी / नवमी का कन्या पूजन नवरात्र व्रत को पूर्ण करता है।
यह षोडशोपचार भावना पर आधारित एक सरल, पूर्ण गृह-पूजा विधि है। क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ भिन्न होती हैं - जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ अपनी परंपरा का ही पालन करें। विधि की पूर्णता से अधिक महत्त्व भाव (भक्ति) का है।
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What is a Puja Vidhi?
A puja vidhi is the step-by-step worship of a Dev or Devi: shuddhi, sankalpa, avahana, snana and alankara, flowers, dhoop-deep, naivedya, japa, aarti and prasad. This page follows a simple Shodashopachara (sixteen-offering) pattern for home worship.
Each deity has a favoured day, flowers, leaves and bhog, plus special rules (tulsi is never offered to Ganesha or on the Shivling; Vishnu and Krishna naivedya is incomplete without it). Family parampara comes first when it differs. Pick a deity for the vidhi, mantra and aarti.
This is not a fast. Fasting procedure is Vrat Vidhi. The item list is Puja Samagri. The story told on a vrat day is Vrat Katha.


