Shri Ganesha श्री गणेश
विघ्नहर्ता — हर पूजा में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले देव।
मुख्य मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
आवश्यक सामग्री
सामान्य पूजा सामग्री (दीपक, घी, धूप, अक्षत, रोली, कलश, पुष्प, फल) के साथ ये वस्तुएँ श्री गणेश के लिए विशेष हैं:
- दूर्वा (इक्कीस दल) Durva grass (21 blades / 3-leaf)
- सिंदूर Sindoor
- लाल पुष्प (गुड़हल / गेंदा) Red flowers (hibiscus / marigold)
- मोदक या लड्डू Modak or laddu
- केला Banana
- जनेऊ Janeu (sacred thread)
- रक्त चंदन Red sandalwood
पूजा विधि — चरण दर चरण
शुद्धि — स्वयं और स्थान की शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ (यथासंभव नए) वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ करें, चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और चारों ओर गंगाजल छिड़कें। पूर्व या उत्तर मुख करके आसन पर बैठें।
संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लें। अपना नाम, गोत्र (ज्ञात हो तो), तिथि-स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलें, फिर जल देव के सम्मुख छोड़ दें।
दीप प्रज्वलन व ध्यान
घी का दीपक और धूप जलाएँ। नेत्र बंद कर श्री गणेश के स्वरूप का ध्यान करें और पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें।
आवाहन — श्री गणेश का आवाहन
हाथ जोड़कर "ॐ गं गणपतये नमः" का उच्चारण करते हुए देव का मूर्ति, चित्र या कलश में आवाहन करें। पुष्प या अक्षत का आसन अर्पित करें।
पाद्य, अर्घ्य व आचमन
चरण धोने (पाद्य), हाथ धोने (अर्घ्य) और आचमन के लिए जल अर्पित करें — एक-एक चम्मच जल देव के सम्मुख थाली में छोड़ें।
स्नान / अभिषेक
मूर्ति को पहले शुद्ध जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से और अंत में पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएँ। कोमल वस्त्र से धीरे से पोंछ लें।
वस्त्र व शृंगार
लाल वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें। अक्षत के साथ लाल चंदन या सिंदूर का तिलक लगाएँ।
पुष्प व पत्र
लाल पुष्प (गुड़हल, गेंदा) और 21 दूर्वा अर्पित करें — दूर्वा का अग्र भाग देव की ओर रहे।
धूप व दीप
धूप और फिर दीप देव को दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाकर दिखाएँ; बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ।
नैवेद्य — भोग अर्पण
भोग अर्पित करें: मोदक या लड्डू (यथासंभव 21), केला। थाली के चारों ओर जल की कुछ बूँदें छोड़कर देव के सम्मुख रखें।
मंत्र जप
"ॐ गं गणपतये नमः" का 108 बार (एक माला) या कम से कम 11 बार स्थिर, शांत मन से जप करें।
आरती
"जय गणेश जय गणेश देवा" की आरती घी के दीपक या कपूर से करें — देव के सम्मुख दक्षिणावर्त घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि
देव की विषम संख्या में प्रदक्षिणा करें (या स्थान पर ही घूमें), अंत में पुष्पांजलि अर्पित कर पूर्ण प्रणाम करें।
क्षमा प्रार्थना व प्रसाद
पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें, देव का धन्यवाद करें और प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें।
श्री गणेश के विशेष नियम
- श्री गणेश को तुलसी कभी अर्पित नहीं की जाती।
- दूर्वा 3 या 5 पत्तियों की जोड़ में, अग्र भाग देव की ओर करके चढ़ाएँ।
- हर अन्य पूजा का आरंभ गणेश स्मरण से होता है — वे सदा प्रथम पूज्य हैं।
यह षोडशोपचार भावना पर आधारित एक सरल, पूर्ण गृह-पूजा विधि है। क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ भिन्न होती हैं — जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ अपनी परंपरा का ही पालन करें। विधि की पूर्णता से अधिक महत्त्व भाव (भक्ति) का है।
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What is a Puja Vidhi?
A puja vidhi is the step-by-step procedure for worshipping a Dev or Devi — from purifying yourself and the place (shuddhi), taking the sankalpa, invoking the deity (avahana), bathing and adorning the murti, offering flowers, dhoop-deep and naivedya (bhog), through mantra japa, aarti and prasad. This tool follows the simple Shodashopachara (sixteen-offering) pattern adapted for home worship.
Each deity has personal preferences — the favoured day, flowers, leaves and bhog, plus special rules (tulsi is never offered to Shri Ganesha or on the Shivling, while Vishnu and Krishna naivedya is incomplete without it). Pick a deity to see its complete vidhi, mantra and aarti, and use the linked Puja Samagri checklist to gather everything before you begin. Family traditions vary — where your parampara differs, follow your parampara.