Maa Lakshmi माँ लक्ष्मी
धन, समृद्धि और कृपा की देवी — दीपावली पर श्री गणेश संग पूजित।
मुख्य मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Mahalakshmyai Namah
आवश्यक सामग्री
सामान्य पूजा सामग्री (दीपक, घी, धूप, अक्षत, रोली, कलश, पुष्प, फल) के साथ ये वस्तुएँ माँ लक्ष्मी के लिए विशेष हैं:
- कमल का पुष्प Lotus flower
- कमलगट्टा Kamalgatta (lotus seeds)
- लाल / गुलाबी पुष्प Red / pink flowers
- खील-बताशे Kheel-batasha
- चांदी का सिक्का Silver coin / Lakshmi-Ganesh coin
- कौड़ी Cowrie shells (kaudi)
- श्री यंत्र Shri Yantra
- इत्र Itra (perfume)
पूजा विधि — चरण दर चरण
शुद्धि — स्वयं और स्थान की शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ (यथासंभव नए) वस्त्र पहनें। पूजा स्थान साफ करें, चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और चारों ओर गंगाजल छिड़कें। पूर्व या उत्तर मुख करके आसन पर बैठें।
संकल्प — अपना उद्देश्य कहें
दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लें। अपना नाम, गोत्र (ज्ञात हो तो), तिथि-स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलें, फिर जल देव के सम्मुख छोड़ दें।
दीप प्रज्वलन व गणेश स्मरण
घी का दीपक और धूप जलाएँ। पहले श्री गणेश का स्मरण करें ("ॐ गं गणपतये नमः") ताकि पूजा निर्विघ्न हो, फिर मन को माँ लक्ष्मी की ओर लगाएँ।
आवाहन — माँ लक्ष्मी का आवाहन
हाथ जोड़कर "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का उच्चारण करते हुए देव का मूर्ति, चित्र या कलश में आवाहन करें। पुष्प या अक्षत का आसन अर्पित करें।
पाद्य, अर्घ्य व आचमन
चरण धोने (पाद्य), हाथ धोने (अर्घ्य) और आचमन के लिए जल अर्पित करें — एक-एक चम्मच जल देव के सम्मुख थाली में छोड़ें।
स्नान / अभिषेक
मूर्ति को पंचामृत और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ। दीपावली पर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश को साथ विराजित करें।
वस्त्र व शृंगार
लाल या गुलाबी वस्त्र, शृंगार सामग्री और इत्र अर्पित करें। मूर्ति के पास श्री यंत्र, कमलगट्टा, कौड़ी और चाँदी का सिक्का रखें।
पुष्प व पत्र
कमल पुष्प — माँ लक्ष्मी को सर्वाधिक प्रिय — तथा लाल या गुलाबी पुष्प अर्पित करें।
धूप व दीप
धूप और फिर दीप देव को दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) घुमाकर दिखाएँ; बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ।
नैवेद्य — भोग अर्पण
भोग अर्पित करें: खीर, खील-बताशा, सफेद या केसर मिठाई। थाली के चारों ओर जल की कुछ बूँदें छोड़कर देव के सम्मुख रखें।
मंत्र जप
"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 108 बार (एक माला) या कम से कम 11 बार स्थिर, शांत मन से जप करें।
आरती
"ॐ जय लक्ष्मी माता" की आरती घी के दीपक या कपूर से करें — देव के सम्मुख दक्षिणावर्त घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
प्रदक्षिणा व पुष्पांजलि
देव की विषम संख्या में प्रदक्षिणा करें (या स्थान पर ही घूमें), अंत में पुष्पांजलि अर्पित कर पूर्ण प्रणाम करें।
क्षमा प्रार्थना व प्रसाद
पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें, देव का धन्यवाद करें और प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें।
माँ लक्ष्मी के विशेष नियम
- घर और पूजा स्थान को पूर्णतः स्वच्छ रखें — जहाँ शुद्धता है वहीं लक्ष्मी निवास करती हैं।
- लक्ष्मी पूजा संध्या समय सर्वोत्तम है, विशेषकर शुक्रवार या दीपावली की रात।
- दीपक को कभी फूँक से न बुझाएँ — उसे स्वयं पूर्ण होने दें या पुष्प से बुझाएँ।
यह षोडशोपचार भावना पर आधारित एक सरल, पूर्ण गृह-पूजा विधि है। क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ भिन्न होती हैं — जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ अपनी परंपरा का ही पालन करें। विधि की पूर्णता से अधिक महत्त्व भाव (भक्ति) का है।
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What is a Puja Vidhi?
A puja vidhi is the step-by-step procedure for worshipping a Dev or Devi — from purifying yourself and the place (shuddhi), taking the sankalpa, invoking the deity (avahana), bathing and adorning the murti, offering flowers, dhoop-deep and naivedya (bhog), through mantra japa, aarti and prasad. This tool follows the simple Shodashopachara (sixteen-offering) pattern adapted for home worship.
Each deity has personal preferences — the favoured day, flowers, leaves and bhog, plus special rules (tulsi is never offered to Shri Ganesha or on the Shivling, while Vishnu and Krishna naivedya is incomplete without it). Pick a deity to see its complete vidhi, mantra and aarti, and use the linked Puja Samagri checklist to gather everything before you begin. Family traditions vary — where your parampara differs, follow your parampara.