जन्माष्टमी व्रत श्री कृष्ण
श्री कृष्ण की जन्म-रात्रि का व्रत — मध्यरात्रि की जन्म पूजा तक रखा जाता है।
व्रत मंत्र
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
Hare Krishna Hare Krishna, Krishna Krishna Hare Hare; Hare Rama Hare Rama, Rama Rama Hare Hare
क्या खाएँ — और क्या नहीं
✓ खा सकते हैं
- दिन भर: फलाहार — फल, दूध, मखाना, साबूदाना
- मध्यरात्रि पूजा के बाद: माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, चरणामृत
- फल और ताज़े फलों का रस
- दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी
- साबूदाना — खिचड़ी, खीर या वड़ा
- कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की रोटी / पूरी
- समा (सामक) के चावल
- मखाना, सूखे मेवे
- आलू, शकरकंद, अरबी — सेंधा नमक में पके
- केवल सेंधा नमक
- चाय, कॉफी या नारियल पानी — संयम से
✗ वर्जित
- सभी अनाज — गेहूँ, चावल, सूजी, बेसन, जई
- दालें व फलियाँ — दाल, चना, राजमा, सोया
- साधारण नमक (केवल सेंधा नमक लें)
- प्याज़ और लहसुन
- मांसाहार और अंडा
- मदिरा और तंबाकू
- तेज़ मसाले — केवल जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च तक सीमित रहें
व्रत विधि — चरण दर चरण
संकल्प — व्रत की सुबह
प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, व्रत (जन्माष्टमी व्रत), शृंखला हो तो उसकी संख्या और अपनी प्रार्थना बोलें — फिर जल छोड़ दें।
प्रातः पूजा
स्नान कर संकल्प लें, लड्डू गोपाल के लिए झूला सजाएँ, और दिन जप-भजन में फलाहार के साथ बिताएँ।
दिन भर व्रत का पालन
व्रत विधिवत रखें — मध्यरात्रि (कृष्ण जन्म) तक फलाहार। खाली क्षणों में "हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥" का जप करें और मन सात्त्विक रखें: क्रोध, निंदा या कटु वचन नहीं।
कथा व संध्या पूजा
मध्यरात्रि (निशीथ काल) में लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें, वस्त्र पहनाकर झूले में विराजित करें, माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी अर्पित करें, जन्म कथा पढ़ें और "आरती कुंज बिहारी की" गाएँ।
मध्यरात्रि जन्मोत्सव
कृष्ण जन्म मध्यरात्रि में मनाया जाता है — अभिषेक, शंख-घंटा ध्वनि, झूलन और जन्म आरती।
पारण — व्रत खोलना
मध्यरात्रि के अभिषेक, जन्म आरती और भोग के बाद — या पारिवारिक परंपरा अनुसार अगली सुबह।
दान व प्रसाद
प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें और सामर्थ्य अनुसार कुछ दान (अन्न, फल या दक्षिणा) करें — दान से ही व्रत पूर्ण होता है।
इस व्रत के विशेष नियम
- कृष्ण नैवेद्य के साथ तुलसी पत्र अवश्य हो।
- धनिया पंजीरी जन्माष्टमी का पारंपरिक प्रसाद है।
- मध्यरात्रि पारण कठिन हो तो अगली सुबह सूर्योदय के बाद व्रत खोलें — दोनों परंपराएँ मान्य हैं।
पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएँ भिन्न होती हैं — जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ उसी का पालन करें। बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ या औषधि ले रहे जन सरल व्रत (फल-दूध) रखें या न रखें — व्रत भक्ति और संयम है, शरीर को कष्ट देना कभी नहीं।
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What is a Vrat Vidhi?
A vrat vidhi is the procedure for keeping a sacred fast — from the morning sankalpa (vow), the deity's puja, the discipline of the fast through the day, the katha (vrat story) and aarti, to the paran (breaking of the fast) at its proper time. Each vrat has its own food rules: most allow phalahar (fruits, milk, sabudana, kuttu and singhara flour, samak rice, with sendha namak only), some are kept nirjala (without even water, like Karwa Chauth), and a few carry one defining rule — no grains on Ekadashi, nothing sour on the Santoshi Mata vrat, no salt on the Ravivar vrat.
Pick a Dev or Devi to see the complete vidhi of their vrat — the day, the fast type, what you can eat and what to avoid, the paran rule, mantra, katha and aarti — and use the linked samagri checklist where one exists. A vrat is bhakti and self-restraint, never hardship: children, the elderly, pregnant women and the unwell should keep a softened form, and family traditions (parampara) always come first.