करवा चौथ व्रत - Vrat Vidhi
करवा चौथ व्रत माँ पार्वती (गौरी)
पति की दीर्घायु हेतु माँ गौरी-पार्वती का निर्जला व्रत - चंद्रोदय पर खोला जाता है।
व्रत मंत्र
ॐ शिवायै नमः
Om Shivayai Namah (to Maa Gauri-Parvati)
क्या खाएँ - और क्या नहीं
खा सकते हैं
- सरगी (केवल सूर्योदय से पूर्व): सेवइयाँ / फेनी, फल, मेवे, मठरी, मिठाई, जल / चाय
- चंद्रोदय के बाद: पहले पति के हाथ से जल, फिर पूर्ण उत्सव भोजन
✗ वर्जित
- सूर्योदय के बाद: अन्न-जल पूर्ण वर्जित - चंद्रोदय तक व्रत निर्जला है
- भारी, तली या अधिक नमकीन सरगी (दिन भर प्यास बढ़ाती है)
- मांसाहार, मदिरा - पूरा दिन सात्त्विक रहे
व्रत विधि - चरण दर चरण
संकल्प - व्रत की सुबह
प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, व्रत (करवा चौथ व्रत), शृंखला हो तो उसकी संख्या और अपनी प्रार्थना बोलें - फिर जल छोड़ दें।
प्रातः पूजा
सूर्योदय से पूर्व सरगी लें (सास द्वारा भेजी) - सेवइयाँ/फेनी, फल, मेवे, मठरी और जल - फिर भोर में निर्जला व्रत का संकल्प लें।
दिन भर व्रत का पालन
व्रत विधिवत रखें - निर्जला - सूर्योदय से चंद्रोदय तक (भोर से पूर्व सरगी)। खाली क्षणों में "ॐ शिवायै नमः" का जप करें और मन सात्त्विक रखें: क्रोध, निंदा या कटु वचन नहीं।
कथा व संध्या पूजा
दोपहर बाद/संध्या में महिलाएँ एकत्र होकर माँ गौरी और करवे की शृंगार सामग्री से पूजा करती हैं, करवा चौथ कथा सुनती हैं और करवे बदलती हैं; चंद्रोदय से पूर्व गौरी-गणेश पूजा करें।
चंद्र दर्शन व अर्घ्य
चंद्रोदय पर करवे से अर्घ्य दें, छलनी से चंद्र दर्शन करें, फिर छलनी घुमाकर पति को देखें - तब व्रत खुलता है।
पारण - व्रत खोलना
चंद्रोदय पर - चंद्रमा को अर्घ्य दें, छलनी से चंद्र (और पति) के दर्शन करें, फिर पति के हाथ से जल पीकर भोजन करें।
दान व प्रसाद
प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें और सामर्थ्य अनुसार कुछ दान (अन्न, फल या दक्षिणा) करें - दान से ही व्रत पूर्ण होता है।
इस व्रत के विशेष नियम
- सोलह शृंगार पारंपरिक है - यह व्रत उत्सवमय है, रूप में कठोर नहीं।
- गर्भवती या अस्वस्थ महिलाएँ निर्जला के स्थान पर फलाहार रूप रखें - भाव मुख्य है, कष्ट नहीं।
- चंद्रोदय समय नगर-नगर भिन्न होता है - संध्या पूजा से पूर्व स्थानीय पंचांग देखें।
पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएँ भिन्न होती हैं - जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ उसी का पालन करें। बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ या औषधि ले रहे जन सरल व्रत (फल-दूध) रखें या न रखें - व्रत भक्ति और संयम है, शरीर को कष्ट देना कभी नहीं।
अन्य व्रत चुनें
What is a Vrat Vidhi?
A vrat vidhi is how to keep a sacred fast: morning sankalpa, the deity's puja, the day's food discipline, the katha and aarti, and paran at the right time. Most vrats allow phalahar (fruits, milk, sabudana, kuttu, singhara, samak, sendha namak). Some are nirjala. Ekadashi drops grain; Santoshi Mata drops sour food; Ravivar vrat drops salt.
A vrat is bhakti and restraint, not hardship. Children, the elderly, pregnant women and the unwell should soften the fast. Parampara comes first. Pick a Dev or Devi for the day, fast type, food rules, paran, mantra, katha and aarti.
This is not a full puja manual. Worship steps are Puja Vidhi. Gather items from Puja Samagri. Read the story on Vrat Katha.


