एकादशी व्रत - Vrat Vidhi
एकादशी व्रत भगवान विष्णु
भगवान विष्णु का मास में दो बार आने वाला एकादशी व्रत - समस्त वैष्णव व्रतों में प्रधान।
व्रत मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
क्या खाएँ - और क्या नहीं
खा सकते हैं
- केवल फलाहार - फल, दूध और व्रत के पदार्थ (समर्थ हों तो निर्जला एकादशी पर पूर्ण निर्जल)
- फल और ताज़े फलों का रस
- दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी
- साबूदाना - खिचड़ी, खीर या वड़ा
- कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की रोटी / पूरी
- समा (सामक) के चावल
- मखाना, सूखे मेवे
- आलू, शकरकंद, अरबी - सेंधा नमक में पके
- केवल सेंधा नमक
- चाय, कॉफी या नारियल पानी - संयम से
✗ वर्जित
- चावल - एकादशी को परंपरागत रूप से पूरा परिवार नहीं खाता
- अन्न और दालें किसी भी रूप में - एकादशी का मूल नियम
- सभी अनाज - गेहूँ, चावल, सूजी, बेसन, जई
- दालें व फलियाँ - दाल, चना, राजमा, सोया
- साधारण नमक (केवल सेंधा नमक लें)
- प्याज़ और लहसुन
- मांसाहार और अंडा
- मदिरा और तंबाकू
- तेज़ मसाले - केवल जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च तक सीमित रहें
व्रत विधि - चरण दर चरण
संकल्प - व्रत की सुबह
प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। दाहिनी हथेली में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, व्रत (एकादशी व्रत), शृंखला हो तो उसकी संख्या और अपनी प्रार्थना बोलें - फिर जल छोड़ दें।
प्रातः पूजा
प्रातः स्नान कर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जपते हुए तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन, धूप-दीप और पंचामृत से भगवान विष्णु की पूजा करें।
दिन भर व्रत का पालन
व्रत विधिवत रखें - फलाहार (या निर्जला) · अन्न पूर्ण वर्जित। खाली क्षणों में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जप करें और मन सात्त्विक रखें: क्रोध, निंदा या कटु वचन नहीं।
कथा व संध्या पूजा
संध्या भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम में बिताएँ; उस एकादशी की कथा पढ़ें और "ॐ जय जगदीश हरे" आरती गाएँ। अनेक भक्त रात्रि जागरण करते हैं।
पारण - व्रत खोलना
अगली सुबह (द्वादशी) सूर्योदय के बाद पारण-काल में - अन्न से व्रत खोलें। पारण समय का पालन करें; वह हरि वासर में न पड़े। अपने नगर का सटीक पारण समय इस साइट के एकादशी कैलेंडर में देखें।
दान व प्रसाद
प्रसाद सभी उपस्थित जनों में बाँटें और सामर्थ्य अनुसार कुछ दान (अन्न, फल या दक्षिणा) करें - दान से ही व्रत पूर्ण होता है।
इस व्रत के विशेष नियम
- एकादशी को तुलसी न तोड़ें - पहले से तोड़े पत्ते अर्पित करें।
- पारण (अगली सुबह) निर्धारित समय में ही करें - हरि वासर में व्रत खोलना वर्जित है।
- पूर्ण उपवास कठिन हो तो एक समय फलाहार लें - मूल भाव संयम और विष्णु स्मरण है।
पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराएँ भिन्न होती हैं - जहाँ आपकी परंपरा भिन्न हो, वहाँ उसी का पालन करें। बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ या औषधि ले रहे जन सरल व्रत (फल-दूध) रखें या न रखें - व्रत भक्ति और संयम है, शरीर को कष्ट देना कभी नहीं।
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What is a Vrat Vidhi?
A vrat vidhi is how to keep a sacred fast: morning sankalpa, the deity's puja, the day's food discipline, the katha and aarti, and paran at the right time. Most vrats allow phalahar (fruits, milk, sabudana, kuttu, singhara, samak, sendha namak). Some are nirjala. Ekadashi drops grain; Santoshi Mata drops sour food; Ravivar vrat drops salt.
A vrat is bhakti and restraint, not hardship. Children, the elderly, pregnant women and the unwell should soften the fast. Parampara comes first. Pick a Dev or Devi for the day, fast type, food rules, paran, mantra, katha and aarti.
This is not a full puja manual. Worship steps are Puja Vidhi. Gather items from Puja Samagri. Read the story on Vrat Katha.


