आज का पंचांग
--:--:-- · Sunday, July 26, 2026
12, AshadhaShukla Paksha, Dwadashi2083 Siddharthi, Vikrama Samvata
- ब्रह्म मुहूर्त
- 4:03 AM – 4:51 AM
- सूर्योदय
- 5:39 AM
- सूर्यास्त
- 7:16 PM
- तिथि
- Dwadashi upto 1:58 PM
- नक्षत्र
- Jyeshtha upto 7:35 AM
- योग
- Indra upto 10:06 PM
- करण
- Balava upto 1:58 PM
- करण
- Kaulava upto 3:10 AM, Jul 27
- पक्ष
- Shukla Paksha
- वार
- Sunday (Ravivara)
- अमांत मास
- Shravana
- पूर्णिमांत मास
- Shravana
- चंद्र राशि
- Vrishchika upto 7:35 AM
- सूर्य राशि
- Karka
- शक संवत
- 1948
- विक्रम संवत
- 2083
- गुजराती संवत
- 2082
शुभ मुहूर्त
आज का प्रमुख मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त सर्वाधिक शुभ
12:00 PM – 12:54 PM
दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, दोपहर के केंद्र में — जब कोई अन्य मुहूर्त उपलब्ध न हो तब लगभग किसी भी नए आरंभ के लिए अनुकूल।
शुभ मुहूर्त शुभ
- ब्रह्म मुहूर्त 4:03 AM – 4:51 AM सूर्योदय-पूर्व का काल — ध्यान, अध्ययन और साधना के लिए आदर्श।
- अभिजित मुहूर्त 12:00 PM – 12:54 PM दिन का सर्वाधिक शुभ काल, दोपहर के आसपास — लगभग किसी भी नए कार्य के लिए उत्तम।
- अमृत काल 9:41 PM, Jul 25 – 11:29 PM, Jul 25 महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नक्षत्र-आधारित अत्यंत शुभ काल।
अशुभ मुहूर्त
आज का मुख्य त्याज्य काल
राहु काल त्याज्य
5:34 PM – 7:16 PM
दिन का राहु-शासित अशुभ अष्टमांश — परंपरागत रूप से किसी भी महत्वपूर्ण या शुभ कार्य, यात्रा और अनुबंध आरंभ करने के लिए त्याज्य।
आज के त्याज्य समय अशुभ
- राहु काल 5:34 PM – 7:16 PM दैनिक राहु काल — महत्वपूर्ण या शुभ कार्य, यात्रा और अनुबंध आरंभ करने से बचें।
- यमगंड 12:27 PM – 2:09 PM यम द्वारा शासित — नए आरंभ और यात्रा के लिए अशुभ।
- गुलिक काल 3:51 PM – 5:34 PM गुलिक (मांदी) काल — शुभ आरंभ के लिए वर्जित; केवल पुनरावर्ती लाभ के लिए प्रयुक्त।
- दुर्मुहूर्त 5:27 PM – 6:21 PM दिन का एक छोटा अशुभ काल — महत्वपूर्ण आरंभ इसके बाद करें।
- वर्ज्यम् 10:54 AM, Jul 25 – 12:42 PM, Jul 25 नक्षत्र-आधारित "त्याज्य" काल — किसी भी शुभ कार्य के लिए टालना उचित।
वैदिक समय अभी
New Delhi, India
1 घटी ≈ 24.0 मिनट · सूर्योदय 5:39 AM से
आज के विशेष योग और सावधानियाँ
- गण्डमूलचंद्रमा गण्डमूल नक्षत्र में है — अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती। यह मुख्यतः नवजात शिशुओं के लिए विचारणीय है: इस समय जन्मे शिशु के लिए नक्षत्र बीतने पर मूल शांति कराने की परंपरा है। सामान्य कार्यों के लिए यह केवल हल्की सावधानी है।
पंचांग क्या है?
पंचांग "पंच" (पाँच) और "अंग" (अवयव) से बना है। यह हिंदू पंचांग प्रतिदिन समय के पाँच अंगों को मापता है, जिससे दिन का स्वभाव और शुभ-अशुभ समय ज्ञात होता है। हम इनकी गणना आपके स्थानीय सूर्योदय पर सूर्य और चंद्रमा की सिद्ध (लाहिड़ी / सिडरीअल) स्थितियों से करते हैं।
- तिथि — चंद्र दिवस, चंद्रमा और सूर्य के बीच के अंतर से तय होता है (30 तिथियाँ)।
- नक्षत्र — चंद्रमा जिस तारामंडल से गुजर रहा है (27 नक्षत्र)।
- योग — सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से निकला मान (27 योग)।
- करण — आधी तिथि; एक चंद्र दिवस में दो करण।
- वार — सप्ताह का दिन।
हर अंग के साथ उसका "upto" समय दिखता है। दैनिक पंचांग कुछ शास्त्रीय संकेत भी दिखाता है: रवि पुष्य, गुरु पुष्य, अमृत सिद्धि योग (शुभ), तथा गण्डमूल और पंचक (सावधानी)। ये वार, नक्षत्र और चंद्र राशि से बनते हैं।
हम अभिजित मुहूर्त — दोपहर का एक छोटा शुभ काल — भी दिखाते हैं। चंद्र मास के नाम अमांत और पूर्णिमांत दोनों पद्धतियों में दिए जाते हैं, और वर्ष शक, विक्रम तथा गुजराती संवत में दिखाया जाता है। दिन के पूरे समय-खंडों के लिए ऊपर दिए शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त (राहु काल, यमगंड, गुलिक काल) देखें, तथा दिन-रात का चौघड़िया देखें। विवाह या गृहप्रवेश का मुहूर्त किसी योग्य ज्योतिषी से पक्का कर लेना उचित है। अपनी राशि का फल जानने के लिए दैनिक राशिफल देखें, या अपने जन्म विवरण से कुंडली मेकर से कुंडली बनाएँ।